Laxmi Kuber Pujan Vidhi : कुबेर पूजा विधि सहित

कुबेर पूजा विधि

आपके पास श्री कुबेर की मूर्ति है तो वह पूजा में उपयोग की जा सकती है। अगर आपके पास कुबेर की मूर्ति नहीं है तो उसके बदले आप तिजोरी या पैसे रखने वाले संदूक को श्री कुबेर के रूप में मानिये और उसकी पूजा कीजिये। तिजोरी, संदूक आदि की पूजा से पहले सिन्दूर से स्वस्तिकदि-चिह्न से अलंकृत करना चाहिए और उस पर 'मौली' बाँधना चाहिए।

Kuber Pujan
Kuber Pujan : कुबेर पूजा विधि

शास्त्रों के अनुसार धनाधिपति कुबेर देवता का नव रूप का वर्णन हैं।

शास्त्रानुसारम् तत्र कुबेर देवस्य नव रूपस्य वर्णनम् अस्ति।

1- उग्र कुबेर- शत्रुओं को हनन करने वाले। 

2- पुष्प कुबेर- सभी प्रकार से दुःखों का निवारण करने वाले। प्रेम यदि में सफलता प्रदान करने वाले होते हैं।

3- चंद्र कुबेर- चंद्र कुबेर की साधना से योग्य पुत्र और धन की प्राप्ति होती हैं ।

4- पीत कुबेर- सभी प्रकार की सुख-समृद्धि सुखी जीवन के कामना के लिए पित कुबेर की पूजा याचना करें।

5- हंस कुबेर- अकस्मात आने वाले कठिनाइयों, विवाद झगड़ा, केस यदि में विजय दिलाने वाले होते हैं। 

6- राग कुबेर-भौतिक आध्यात्मिक विद्या संगीत कला नृत्य आदि सभी प्रकार के ज्ञान प्राप्ति के लिये राग कुबेर की अराधना फलदायी हैं।

7- अमृत कुबेर-शारीरिक मानसिक अन्य सभी प्रकार के रोग से मुक्ति, सुख प्राप्ति के कामना की प्राप्ति के लिए।

8- प्राण कुबेर-व्यर्थ धन खर्च, ऋण से मुक्ति से परेशान हो तो प्राण कुबेर का आराधना पूजा करनी चाहिये।

9- राग कुबेर- हम जीवन में जो भी कर्म करते हैं उसके शुभ फल प्राप्ति के लिये एवं मनोकामना सिद्धि के लिए राग कुबेर पूजन करें।

ध्यान (Dhyana)सर्व प्रथम निम्नलिखित मन्त्र द्वारा श्री कुबेर का ध्यान करें। विशेष कर कुबेर पूजन दीवाली के दौरान किया जाता हैं।

मनुज-ब्राह्म-विमान-स्थितम्,
गरुड-रत्न-निभं निधि-नायकम्।
शिव-सखं मुकुटादि-विभूषितम्
वर-गदे दधतं भजे तुन्दिलम्।।

Dhyana Mantra मन्त्र अर्थ - मानव-स्वरूप, विमान पर विराजमान, श्रेष्ठ गरुड़ के समान सभी निधियों के स्वामी, भगवान् शिव के मित्र, मुकुट आदि से सुशोभित और हाथों में वर-मुद्रा एवं गदा धारण करनेवाले भव्य धनाधिपति श्रीकुबेर की मैं वन्दना करता हूँ।

आवाहन (Aavahan) भगवान् श्रीकुबेर का ध्यान करने के बाद तिजोरी-बक्से आदि के सम्मुख आवाहन-मुद्रा दिखाकर, निम्न मन्त्र द्वारा उनका आवाहन करें।

Aavahan Mantra मन्त्र अर्थ - हे देव, सुरेश्वर! मैं आपका आवाहन करता हूँ। आप यहाँ पधारें, कृपा करें। सदा मेरे भण्डार की वृद्धि करें और रक्षा करें। ॥मैं श्रीकुबेर देव का आवाहन करता हूँ॥

पुष्पाञ्जलि-आसन ( Pushpanjali Asana ) आवाहन करने के बाद निम्न मन्त्र पढ़कर श्रीकुबेर देव के आसन के लिए पुष्प अञ्जलि में लेकर अपने सामने, तिजोरी-बक्से आदि के निकट छोड़े।

नाना-रत्न-संयुक्तं कार्त्त-स्वर-विभूषितम्।
प्रीत्यर्थं देव-देवेश ! आसन प्रति गृह्यताम् ।।

Pushpanjali Mantra मन्त्र अर्थ - हे देवताओं के ईश्वर! विविध प्रकार के रत्न से युक्त स्वर्ण-सज्जित आसन को प्रसन्नता हेतु ग्रहण करें। ॥भगवान् श्रीकुबेर के आसन के लिए मैं पुष्प अर्पित करता हूँ॥

धनवंतरि आज घर में आएं,
स्वास्थ्य धन सबको दे जाएं।।
लक्ष्मी-गणपति-कुबेर का,
हम सभी आशीर्वाद पाएं!

धन्वन्तरी अद्य गृहम् आगच्छतु
सर्वेभ्यः स्वास्थ्य धनं ददातु।।
लक्ष्मी-गणपति-कुबेरम्
सर्वे वयं धन्याः करोतु
।।

यथालब्धोपचार पूजन ( Yatha Labdho Upchara Pujan) इसके बाद 'चन्दन-अक्षत-पुष्प-धूप-दीप-नैवेद्य' से भगवान् श्रीकुबेर का पूजन निम्न मन्त्रों द्वारा करें। 

Pushpanjali Mantra पूजन समर्पण (Puja Samarpan) इस प्रकार पूजन करने के बाद मन्त्र सहित हाथ में गन्ध, अक्षत, पुष्प लेकर दाहिने हाथ द्वारा निम्न मन्त्र पढ़ते हुए 'तिजोरी- संदूक' आदि पर छोड़े। 

धनाध्यक्षाय देवाय नरयानोपवेशिने। नमस्ते राज राजाय कुबेराय महात्मने ।।

Pushpanjali Mantra मन्त्र अर्थ - श्रीकुबेर को नमस्कार! इस पूजन से श्रीकुबेर भगवान् प्रसन्न हों, उन्हें बारम्बार नमस्कार।

॥इसके साथ श्री-कुबेर पूजा समाप्त हुयी॥

आपका मंगल हो, प्रभु कल्याण करे

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